Tuesday, 24 April 2018

रामलला हम आयेंगे।

रामलला हम आयेंगे, मंदिर वहीँ बनायेंगे।
जो सिर श्रीराम ना बोले, पकड़ पकड़ लतियाएँगे।
रामलला हम आयेंगे.....

पढ़ने के लिये स्कूल ना हो, घर मे चाहे चूल्हा ना हो।
चाहे रोटी का जुगाड़ ना हो, कोई भी कारोबार ना हो।
गाय-बैल के नाम पर, जनता को लड़वायंगे।
रामलला हम आयेंगे.....

अस्पताल, सड़क, रेल व गोदाम अनाज के।
एक भी नही है आज काम के।
सरकारी स्कूल और कॉलेज।
यहां नही मिलता अब नॉलेज।
पैसे वाले को क्या दिक्कत, प्राइवेट में जाएंगे।
रामलला हम आयेंगे.....

एक हाथ मे झंडा लेलो, एक हाथ मे डंडा।
जो रोजगार की बात करे तो, देशद्रोही का देदो तमगा।
आटा मांगें, डाटा दे दो।
रोटी डाउनलोड करादो।
मोबाईल, टीवी और क्रिकेट, हर घर पहुचायेंगे।
रामलला हम आयेंगे.....

अब तो गंगा देती दुहाई, कि कैसे होगी मेरी सफाई।
चारो तरफ से नाले गिरते, नेता खाली बजट बढ़ाते।
पंडो की भी अजब है लीला, मेरे नाम का करते खेला।
लाखो टन लकड़ियों को फूंक, मुर्दा वही जलाएंगे।
रामलला हम आयेंगे.....

कोक, पेप्सी, लिम्का, माजा।
जो भी मिले गटक जा राजा।
कुंआ, बावड़ी, ताल-तैलया।
सूखते है तो सुखन दो भईया।
बेकार का हाहाकार मचा है, पानी मिलता बिस रुपया।
हवा अभी तक फ्री मिली है, उसको भी बिक़वाएँगे।
रामलला हम आयेंगे.....

रोटी-बेटी, रिस्ते-नाते, जाती एक कसौटी है।
अगड़ा, पिछड़ा, धर्म-कर्म, सबके अपने सपने है।
पांडे बोले, ठाकुर साहिब, तुम हिन्दू, हम हिन्दू।
बस अब हम जल्दी ही विश्वगुरु बन जाएंगे।
रामलला हम आयेंगे.....

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